बिलासपुर –भारतीय शास्त्रीय नृत्य और विशेष रूप से रायगढ़ कथक घराने के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण क्षण है। वरिष्ठ कथकाचार्य, पद्मश्री सम्मानित एवं रायगढ़ कथक घराने के एकमात्र जीवित दरबारी नर्तक पंडित रामलाल बरेठ को संगीत नाटक अकादमी की सर्वोच्च फेलोशिप ‘अकादमी फेलोशिप (अकादमी रत्न)’ से सम्मानित किए जाने का निर्णय लिया गया है। यह प्रतिष्ठित सम्मान उन्हें महामहिम राष्ट्रपति द्वारा प्रदान किया जाएगा।

यह उपलब्धि न केवल पंडित रामलाल बरेठ के दशकों लंबे कला-साधना जीवन का सम्मान है, बल्कि रायगढ़ कथक घराने की समृद्ध परंपरा और उसके वैश्विक योगदान की भी राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृति है। कला जगत में इस घोषणा के बाद खुशी और उत्साह का माहौल है।
रायगढ़ कथक घराने के गौरवशाली प्रतिनिधि
रायगढ़ में जन्मे पंडित रामलाल बरेठ का कला जीवन उस दौर से जुड़ा है जब रायगढ़ रियासत भारतीय संगीत और नृत्य का प्रमुख केंद्र हुआ करती थी। उन्हें रायगढ़ रियासत के महान कला संरक्षक राजा चक्रधर सिंह तथा उनके पिता पंडित कार्तिक राम के संरक्षण और मार्गदर्शन में कथक की शिक्षा प्राप्त हुई।

वे आज रायगढ़ कथक घराने के एकमात्र जीवित दरबारी नर्तक हैं, जिन्होंने इस घराने की मूल परंपराओं को न केवल संरक्षित रखा बल्कि उन्हें देश-विदेश के मंचों तक पहुंचाया।
देश-विदेश में दिलाई रायगढ़ कथक घराने को पहचान
पंडित रामलाल बरेठ ने अपनी साधना, समर्पण और उत्कृष्ट प्रस्तुति के बल पर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर रायगढ़ कथक घराने को विशिष्ट पहचान दिलाई। उन्होंने कथक नृत्य की परंपरागत शैली को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और उसके संरक्षण-संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उनकी प्रस्तुतियों और शिक्षण कार्यों ने रायगढ़ कथक घराने को विश्व पटल पर स्थापित करने में अहम योगदान दिया है।
शिक्षण और गुरु परंपरा में भी निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
पंडित रामलाल बरेठ ने लंबे समय तक इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय में रीडर के रूप में अपनी सेवाएं दीं। इसके बाद वर्ष 1981 से 2011 तक उन्होंने चक्रधर नृत्य केंद्र में गुरु के रूप में कार्य किया।

अपने तीन दशक से अधिक लंबे शिक्षण काल में उन्होंने अनेक प्रतिभाशाली शिष्यों को कथक की बारीकियों से प्रशिक्षित किया। उनके शिष्य आज देश और विदेश के विभिन्न मंचों पर रायगढ़ कथक घराने का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
नई पीढ़ी तक पहुंच रही कला की विरासत
पंडित रामलाल बरेठ ने अपने पुत्र एवं कथक नृत्याचार्य गुरु भूपेंद्र बरेठ को भी कथक कला में दक्ष बनाया। वर्तमान में गुरु भूपेंद्र बरेठ बिलासपुर में कार्तिक कथक नृत्य केंद्र का संचालन कर रहे हैं और नई पीढ़ी को कथक नृत्य का प्रशिक्षण प्रदान करते हुए रायगढ़ कथक घराने की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।सम्मानों से भरा रहा कला जीवन
पंडित रामलाल बरेठ को उनके अतुलनीय योगदान के लिए अनेक प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हो चुके हैं, जिनमें—
मध्यप्रदेश शासन का शिखर सम्मान
छत्तीसगढ़ शासन का चक्रधर सम्मान
संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार
वर्ष 2024 का पद्मश्री सम्मान
शामिल हैं।अब संगीत नाटक अकादमी की सर्वोच्च फेलोशिप ‘अकादमी रत्न’ से सम्मानित होना उनके कला जीवन की एक और ऐतिहासिक उपलब्धि है।
छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण,,,,
पंडित रामलाल बरेठ को ‘अकादमी रत्न’ से सम्मानित किए जाने की घोषणा के बाद कला एवं संस्कृति जगत में खुशी की लहर है। यह सम्मान पूरे छत्तीसगढ़, विशेष रूप से रायगढ़ और बिलासपुर के लिए गर्व और सम्मान का विषय माना जा रहा है। कला प्रेमियों, शिष्यों और सांस्कृतिक संगठनों ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए इसे रायगढ़ कथक घराने की ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है।
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