August 23, 2026

छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम फिर पुस्तक वितरण में विफल : निजी विद्यालय संचालक संघ.. अध्यक्ष विष्णु कौशिक

Share this

बिलासपुर/- छत्तीसगढ़ शासन द्वारा स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत कक्षा 1 से 10 तक के विद्यार्थियों को निशुल्क पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराई जाती हैं। वर्षों से शासकीय विद्यालयों को कक्षा 1 से 8 तक की पुस्तकें संकुल स्तर पर तथा कक्षा 9 से 12 तक की पुस्तकें विद्यालय स्तर पर उपलब्ध कराई जाती रही हैं। वहीं निजी विद्यालयों को जिला मुख्यालय से कक्षा 1 से 10 तक की पुस्तकें प्राप्त होती थीं और व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित होती रही।किन्तु शैक्षणिक सत्र 2025-26 में पहली बार निजी विद्यालयों को पुस्तक वितरण हेतु प्रदेश के केवल 6 डिपो निर्धारित किए गए। परिणामस्वरूप निजी विद्यालयों को बार-बार डिपो के चक्कर लगाने पड़े तथा उन्हें समय और धन दोनों की भारी हानि उठानी पड़ी। जहां शासकीय विद्यालयों को 15 जून 2025 तक पुस्तकें उपलब्ध करा दी गईं, वहीं अनेक निजी विद्यालयों को सितंबर 2025 तक भी पूर्ण पुस्तकें प्राप्त नहीं हो सकीं। कुछ विषयों की पुस्तकें तो सत्र समाप्ति तक उपलब्ध नहीं हो पाईं।

संघ का आरोप है कि पिछले वर्ष पुस्तक स्कैनिंग की अनिवार्यता भी निजी विद्यालयों पर थोप दी गई थी, जबकि शासकीय विद्यालयों को विद्यालय स्तर पर स्कैनिंग की छूट प्रदान की गई। बाद में छत्तीसगढ़ राज्य अशासकीय विद्यालय संचालक संघ के विरोध एवं मांग के बाद निजी विद्यालयों को भी विद्यालय स्तर पर स्कैनिंग की अनुमति दी गई।संघ का कहना है कि स्कैनिंग व्यवस्था के कारण शिक्षकों को 15 दिन से लेकर एक माह तक शैक्षणिक कार्य छोड़कर केवल पुस्तकों की स्कैनिंग में समय देना पड़ा। पुस्तकों की चोरी रोकने के नाम पर लागू की गई यह व्यवस्था आज तक किसी ठोस प्रमाण के आधार पर उचित सिद्ध नहीं हो सकी है।

संघ ने यह भी आरोप लगाया कि सत्र 2025-26 में पुस्तकों के कबाड़ में मिलने की घटनाएं तब सामने आईं, जब पुस्तकें विद्यालयों तक पहुंची भी नहीं थीं। इसके बावजूद अब तक किसी अधिकारी या कर्मचारी की जवाबदेही तय नहीं की गई है।संगठन केप्रतिनिधिमंडल ने पूर्व में मुख्यमंत्री एवं पाठ्य पुस्तक निगम के अधिकारियों से मुलाकात कर निजी विद्यालयों को भी शासकीय विद्यालयों की तरह संकुल स्तर पर समय पर पुस्तक वितरण की मांग की थी। आश्वासन के बावजूद वर्तमान सत्र 2026-27 में भी निजी विद्यालयों को पुनः 6 डिपो से पुस्तक प्राप्त करने के निर्देश जारी किए गए हैं।16 जून से नया शैक्षणिक सत्र प्रारंभ होना है, लेकिन 11 जून तक निजी विद्यालयों के लिए पुस्तक वितरण की कोई तिथि घोषित नहीं की गई है। संघ का कहना है कि एक डिपो प्रतिदिन अधिकतम 40 से 50 विद्यालयों को ही पुस्तकें उपलब्ध करा सकता है। ऐसी स्थिति में प्रदेश के लगभग 8,000 निजी विद्यालयों तक पुस्तकें पहुंचाने में कई महीने लग सकते हैं।

संघ ने वर्तमान ईंधन संकट का उल्लेख करते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री की इंधन बचत की मंशा को ध्यान में रखते हुए निजी विद्यालयों को भी संकुल स्तर पर पुस्तक वितरण की व्यवस्था की जानी चाहिए। इस संबंध में मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री को ज्ञापन भी सौंपा गया है।निजी विद्यालय संचालक संघ, बिलासपुर ने शासन से मांग की है कि यदि छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम समय पर पुस्तक वितरण करने में सक्षम नहीं है तो वितरण व्यवस्था की जिम्मेदारी शिक्षा विभाग को सौंप दी जाए तथा जिला शिक्षा अधिकारी एवं विकासखंड शिक्षा अधिकारी के माध्यम से पुस्तकें वितरित कराई जाएं।संघ ने सुझाव दिया है कि राष्ट्रीय स्तर पर अपनाई जा रही व्यवस्था के अनुरूप पाठ्यपुस्तकों को खुले बाजार में भी उपलब्ध कराया जाए तथा सरकार डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से विद्यार्थियों के खातों में पुस्तक राशि हस्तांतरित करे।संघ का मत है कि लगातार विफल हो रही वर्तमान व्यवस्था की समीक्षा कर एनसीईआरटी की तर्ज पर नई प्रणाली विकसित की जाए। यदि समय पर पुस्तकें उपलब्ध नहीं कराई गईं तो संगठन पुनः आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा।

Editor in chief at  | +91 7415187590 | Website |  + posts

विज्ञापन एवं समाचार प्रकाशित करवाने हेतु संपर्क करें Prabhat Chhattisgarh ( Prabhat Sonchhatra
Prabhatsonchhatra@gmail.com
https://www.prabhatchhattisgarh.in