बिलासपुर, सिरगिट्टी थाना क्षेत्र के ग्राम धूमा में जलभराव की गंभीर समस्या को लेकर ग्रामीणों द्वारा किए गए नेशनल हाईवे चक्काजाम के मामले में पुलिस ने छह नामजद आरोपियों सहित अन्य लोगों के खिलाफ अपराध दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार बिना किसी पूर्व अनुमति या सूचना के राष्ट्रीय राजमार्ग पर प्रदर्शन कर आवागमन बाधित किया गया, जिससे करीब चार घंटे तक यातायात प्रभावित रहा। इस दौरान एम्बुलेंस सहित कई आवश्यक सेवाओं के वाहन भी जाम में फंस गए और आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार 18 जुलाई 2026 की सुबह ग्राम धूमा के बड़ी संख्या में ग्रामीण गांव में लंबे समय से बनी जलभराव की समस्या को लेकर नेशनल हाईवे पर एकत्र हुए। ग्रामीणों का आरोप है कि बरसात के दिनों में गांव की सड़कें और आसपास का क्षेत्र पानी से भर जाता है, जिससे लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो जाता है। कई बार प्रशासन और संबंधित विभाग को शिकायत करने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं होने से ग्रामीणों में लगातार नाराजगी बनी हुई थी।
बताया गया कि इसी नाराजगी के चलते ग्रामीणों ने हाईवे पर उतरकर प्रदर्शन शुरू कर दिया और सड़क पर बैठकर आवागमन रोक दिया। सूचना मिलने पर सिरगिट्टी थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस के अनुसार प्रदर्शन का नेतृत्व विवेक पटेल, लक्ष्मण पटेल, जितेन्द्र पटेल, मिनी पटेल और कविता पटेल सहित अन्य लोग कर रहे थे। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से कई बार बातचीत कर सड़क खाली करने और यातायात बहाल करने की अपील की, लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े रहे।
सुबह लगभग 9 बजे से शुरू हुआ यह चक्काजाम दोपहर करीब 1 बजे तक जारी रहा। इस दौरान हाईवे के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। यात्री बसें, निजी वाहन, मालवाहक ट्रक और मरीजों को अस्पताल ले जा रही एम्बुलेंस भी जाम में फंस गईं। कई यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ा, जिससे लोगों में भी नाराजगी देखने को मिली।
पुलिस का कहना है कि बिना पूर्व सूचना या प्रशासनिक अनुमति के राष्ट्रीय राजमार्ग पर इस प्रकार का प्रदर्शन कर यातायात बाधित करना कानून का उल्लंघन है। इसी आधार पर सिरगिट्टी थाना पुलिस ने विवेक पटेल, लक्ष्मण पटेल, जितेन्द्र पटेल, मिनी पटेल, कविता पटेल सहित अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 126(2) एवं 191(2) के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है। पुलिस मामले से जुड़े वीडियो फुटेज और अन्य साक्ष्यों की भी जांच कर रही है।
वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों का कहना है कि उनका आंदोलन किसी व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि गांव की वर्षों पुरानी जलभराव की समस्या के समाधान के लिए था। उनका आरोप है कि बरसात के दौरान गांव की स्थिति बेहद खराब हो जाती है, जिससे बच्चों की पढ़ाई, किसानों की आवाजाही और आम जनजीवन प्रभावित होता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द जल निकासी की स्थायी व्यवस्था की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।
फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है, जबकि ग्रामीण अपनी मूल समस्या के समाधान की मांग पर कायम हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन जलभराव की समस्या के समाधान के लिए क्या कदम उठाता है और दोनों पक्षों के बीच इस विवाद का समाधान किस प्रकार निकलता है।
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