August 23, 2026

जनजातीय गरिमा उत्सव के तहत 118 गांवों में जन भागीदारी अभियान शुरू, वंचितों तक पहुंचेगा योजनाओं का लाभ

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बिलासपुर, जनजातीय कार्य मंत्रालय के निर्देशानुसार जिले में जनजातीय गरिमा उत्सव के अंतर्गत जन भागीदारी अभियान का शुभारंभ किया गया। कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल ने मंथन सभाकक्ष में आयोजित अधिकारियों के ओरियंटेशन कार्यक्रम के साथ अभियान की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि यह अभियान केवल योजनाओं के क्रियान्वयन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आदिवासी समुदाय के समग्र सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम बनेगा।

जिले के आदिवासी बहुल 118 गांवों की लगभग 1 लाख आबादी को लक्षित कर यह विशेष अभियान संचालित किया जा रहा है। इनमें 3674 विशेष पिछड़ी जनजाति के बैगा एवं बिरहोर परिवार भी शामिल हैं। अभियान के तहत 19 से 25 मई तक विभिन्न हितग्राही मूलक योजनाओं में पात्र लेकिन अब तक वंचित लोगों को लाभान्वित किया जाएगा। जिला पंचायत सीईओ संदीप अग्रवाल सहित संबंधित विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे।

अभियान के अंतर्गत ग्राम स्तर पर स्वास्थ्य परीक्षण शिविर लगाए जाएंगे, जहां ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण कर आवश्यक उपचार एवं परामर्श उपलब्ध कराया जाएगा। 20 मई को प्रत्येक गांव में ग्राम संपर्क अभियान चलाया जाएगा, जिसमें अधिकारी, कर्मयोगी, समाजसेवी एवं जनप्रतिनिधि ग्रामीणों से सीधे संवाद कर योजनाओं की जानकारी देंगे तथा आगामी जनसुनवाई की तिथियों से अवगत कराएंगे। 21 से 23 मई तक गांवों में जनसुनवाई आयोजित कर ग्रामीणों की समस्याएं सुनी जाएंगी और उनका त्वरित निराकरण किया जाएगा। जनसुनवाई की पूरी कार्रवाई का विधिवत दस्तावेजीकरण भी किया जाएगा। कलेक्टर श्री अग्रवाल ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि गांवों में सबसे गरीब, दिव्यांग एवं जरूरतमंद लोगों की सूची तैयार कर यह सुनिश्चित करें कि वे शासन की किसी योजना से वंचित न रहें। उन्होंने कहा कि जिन आदिवासी परिवारों को अभिलेखों के अभाव में जाति प्रमाण पत्र बनवाने में कठिनाई होती है, उनके लिए वंशवृक्ष तैयार कर ग्राम पंचायत से अनुमोदन कराया जाए।

कलेक्टर ने खाद-बीज वितरण सुनिश्चित करने, कच्चे वन एवं कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण में ग्रामीणों की मदद करने तथा कोटा क्षेत्र में मक्के की खेती को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। इच्छुक किसानों की सूची बनाकर उन्हें मिनी किट एवं अन्य आवश्यक कृषि आदान सामग्री उपलब्ध कराने कहा गया। जल संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कलेक्टर ने निर्देश दिए कि प्रत्येक पात्र किसान के खेत में डबरी निर्माण कराया जाए। विशेष रूप से फैक्चर जोन वाले क्षेत्रों में जल संरक्षण संरचनाएं विकसित कर भू-जल स्तर बनाए रखने पर जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक गांव में जल संरक्षण से जुड़े कम से कम एक-दो स्थायी कार्य अवश्य संचालित हों। कलेक्टर ने कहा कि सभी विभाग समन्वित प्रयासों से पात्र हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ दिलाएं, ताकि आदिवासी गांवों को विकास और आत्मनिर्भरता के मॉडल के रूप में विकसित किया जा सके।

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