बिलासपुर, 03 जुलाई 2026 छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के उस महत्वपूर्ण फैसले का स्वागत करती है, जिसमें न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि सरकारी स्कूलों में किसी भी छात्र को किसी विशेष धर्म की प्रार्थना, मंत्र या वंदना का पाठ करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने इस बात पर बल दिया है कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता तथा अंतरात्मा की स्वतंत्रता का अधिकार प्रदान करता है और सरकारी शैक्षणिक संस्थानों में इस सिद्धांत का पूर्ण पालन आवश्यक है।
जमाअत-ए-इस्लामी हिन्द का प्रारंभ से ही यह मत रहा है कि भारत का संविधान एक धर्मनिरपेक्ष और बहुधार्मिक समाज की नींव प्रदान करता है, जहाँ प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म का पालन करने और अपने विश्वासों के अनुसार जीवन जीने की पूर्ण स्वतंत्रता प्राप्त है। सरकारी शैक्षणिक संस्थान सभी धर्मों और वर्गों के विद्यार्थियों के साझा संस्थान हैं, इसलिए वहाँ किसी एक धर्म की प्रार्थनाओं या धार्मिक अनुष्ठानों को अनिवार्य बनाना संविधान की भावना और राष्ट्रीय एकता की आवश्यकताओं के विरुद्ध है।
जमाअत-ए-इस्लामी हिन्द इस कानूनी संघर्ष में शामिल सभी व्यक्तियों, अधिवक्ताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं के प्रयासों की सराहना करती है, जिन्होंने संवैधानिक मूल्यों, धार्मिक स्वतंत्रता और शैक्षणिक संस्थानों के धर्मनिरपेक्ष एवं निष्पक्ष स्वरूप की रक्षा के लिए आवाज़ उठाई। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि भविष्य में किसी छात्र को धार्मिक प्रार्थनाओं या अनुष्ठानों में भाग लेने के लिए बाध्य किया जाता है, तो प्रभावित पक्ष पुनः न्यायालय का दरवाज़ा खटखटा सकते हैं।
जमाअत-ए-इस्लामी हिन्द, बिलासपुर सरकार से आग्रह करती है कि वह राज्य के सभी शैक्षणिक संस्थानों में भारतीय संविधान के मूल सिद्धांतों, विशेष रूप से धार्मिक स्वतंत्रता, समानता और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के पालन को सुनिश्चित करे तथा ऐसी किसी भी नीति या कदम से बचे जिससे समाज में धार्मिक विभाजन या उपेक्षा की भावना उत्पन्न होने की आशंका हो।
हम आशा करते हैं कि राज्य के सभी शैक्षणिक संस्थान ज्ञान, नैतिकता, राष्ट्रीय एकता और पारस्परिक सम्मान के केंद्र बनेंगे, जहाँ प्रत्येक धर्म और प्रत्येक वर्ग के विद्यार्थी स्वयं को सुरक्षित, सम्मानित और समान अवसरों से युक्त महसूस करेंगे। उक्त बातें जमात ए इस्लामी हिन्द,बिलासपुर के अध्यक्ष वाहिद सिद्दीकी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा!
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