August 23, 2026

ग्राम सिलदहा के किसान राम कुमार पालके का बदला जीवन

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बिलासपुर, 7 जनवरी 2026/जिले के कोटा विकासखंड के ग्राम सिलदहा के किसान  राम कुमार पालके किसान हितैषी योजनाओं से लाभान्वित होकर अब आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ चुके हैं कृषक हितैषी योजनाओं से लाभ लेकर अब वे अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं। इन योजनाओं के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री मुख्यमंत्री का आभार जताया है।

कोटा के ग्राम सिलदहा के किसान राम कुमार पालके लंबे समय तक परंपरागत खेती पर निर्भर रहे। सीमित संसाधन, मौसम की अनिश्चितता, बढ़ती लागत और फसल का उचित मूल्य न मिल पाने के कारण आमदनी बहुत कम थी। कई बार खेती के लिए उधार लेना पड़ता था और फसल खराब होने पर परिवार की आर्थिक स्थिति और भी कमजोर हो जाती थी। उन्होंने बताया कि वे सात एकड़ में खेती करते हैं, भविष्य को लेकर चिंता हमेशा बनी रहती थी। लेकिन किसान हितैषी योजनाओं से उन्हें बड़ा सहारा मिला है। विभिन्न किसान हितैषी योजनाओं से जुड़कर अब उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आ रहा है।

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना से मिल रही आर्थिक सहायता से बीज, खाद और दवाइयों की व्यवस्था समय पर होने लगी। अब खेती के लिए किसी के आगे हाथ फैलाने की मजबूरी नहीं रही। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना मौसम की मार से जब फसल को नुकसान पहुँचा, तब बीमा राशि ने उन्हें बड़े घाटे से बचा लिया, जिससे उन्हें यह भरोसा हुआ कि प्राकृतिक आपदा में सरकार किसानों के साथ खड़ी है। किसान क्रेडिट कार्ड से कम ब्याज दर पर ऋण मिलने से साहूकारों पर निर्भरता समाप्त हो गई और खेती से जुड़े सभी कार्य समय पर और व्यवस्थित ढंग से होने लगे। उन्नत कृषि तकनीक एवं योजनाएँ जैसे सरकारी मार्गदर्शन से उन्होंने आधुनिक खेती के तरीकों को अपनाया, बेहतर बीज और संतुलित खाद का उपयोग किया। इससे उत्पादन में बढ़ोतरी हुई और लागत में कमी आई। इन योजनाओं से फसल की गुणवत्ता बेहतर हुई, पैदावार बढ़ी और बाजार में उचित मूल्य मिलने लगा। जहां पहले सीमित आमदनी में परिवार चलाना कठिन था, वहीं अब खेती से स्थायी और सम्मानजनक आय होने लगी।

उन्होंने बताया कि कृषक उन्नति योजना से उन्हें बड़ा संबल मिला है कि इस वर्ष वे अपना धान बेच चुके हैं जिसमें उन्हें किसी तरह की दिक्कत नहीं हुई। 110 क्विंटल धान की बिक्री से मिले पैसे का उपयोग वे अपने घर के जरूरी कामों में करेंगे। उन्होंने बताया कि वे पॉम ऑयल की खेती भी कर रहे हैं जिससे उन्हें शासन की ओर से अनुदान भी मिल रहा है। उन्होंने कहा कि अपने बच्चों की पढ़ाई, घर की ज़रूरतों और खेती के विस्तार तीनों को अब वे बिना आर्थिक तनाव के संभाल पा रहे हैं और कर्ज के दुष्चक्र से बाहर निकलकर आत्मनिर्भर किसान बन चुके हैं।

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